लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायल के घातक हमले और बढ़ता युद्ध का खतरा

लेबनान में हिजबुल्लाह पर इजरायल के घातक हमले और बढ़ता युद्ध का खतरा

इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच का संघर्ष अब उस मोड़ पर पहुँच गया है जहाँ से वापसी का रास्ता धुंधला दिखाई देता है। हाल ही में इजरायल ने लेबनान पर जो ताबड़तोड़ हमले किए हैं, उन्होंने न केवल हिजबुल्लाह के सैन्य ढांचे को हिला कर रख दिया है, बल्कि संगठन के शीर्ष नेतृत्व के सुरक्षा घेरे में भी सेंध लगा दी है। सबसे बड़ी खबर यह है कि इन हमलों में हिजबुल्लाह प्रमुख हसन नसरल्लाह के एक बेहद करीबी और निजी सलाहकार के मारे जाने की सूचना है। यह कोई छोटी घटना नहीं है। जब किसी संगठन के मुखिया का "साया" माना जाने वाला व्यक्ति खत्म होता है, तो वह केवल एक मौत नहीं होती, बल्कि पूरे सुरक्षा तंत्र की विफलता होती है।

लेबनान की धरती एक बार फिर धमाकों से गूंज रही है। इजरायली वायुसेना ने दक्षिणी लेबनान और बेरुत के उपनगरीय इलाकों को अपना निशाना बनाया है। इजरायल का कहना है कि वे केवल आतंकवादियों के ठिकानों को ध्वस्त कर रहे हैं, लेकिन हकीकत यह है कि इन हमलों ने पूरे मध्य पूर्व में युद्ध की आग को और भड़का दिया है। आप इसे एक रणनीतिक जीत कह सकते हैं या एक खतरनाक उकसावा, लेकिन यह साफ है कि नेतन्याहू सरकार अब आर-पार के मूड में है। Learn more on a similar topic: this related article.

हिजबुल्लाह के भीतर डर का माहौल

जब इजरायल ने नसरल्लाह के निजी सलाहकार को निशाना बनाया, तो उसने एक स्पष्ट संदेश दिया। संदेश यह कि इजरायली इंटेलिजेंस एजेंसी मोसाद और सैन्य खुफिया इकाई 8200 हिजबुल्लाह के बेडरूम तक पहुँच चुकी हैं। किसी भी विद्रोही संगठन के लिए उसका 'इनर सर्कल' सबसे पवित्र और सुरक्षित जगह होती है। अगर वहां बैठा व्यक्ति मारा जाता है, तो संगठन के भीतर अविश्वास की लहर दौड़ जाती है। कौन खबर दे रहा है? तकनीक कहाँ फेल हुई? ये सवाल अब हिजबुल्लाह को अंदर ही अंदर खा रहे होंगे।

हिजबुल्लाह अब तक खुद को एक अनुशासित और अभेद्य दीवार की तरह पेश करता रहा है। लेकिन हालिया पेजर धमाकों और फिर इन चुन-चुन कर किए गए हवाई हमलों ने उस छवि को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया है। यह हमला सिर्फ बारूद का खेल नहीं है, यह मनोवैज्ञानिक युद्ध है। इजरायल जानता है कि हिजबुल्लाह को हराने के लिए केवल उसकी मिसाइलें खत्म करना काफी नहीं है, उसके नेतृत्व के आत्मविश्वास को तोड़ना जरूरी है। Further analysis by Associated Press delves into related views on the subject.

क्या यह पूर्ण युद्ध की शुरुआत है

ईमानदारी से कहूँ तो हम "युद्ध की कगार" वाली बात बहुत सुन चुके हैं। अब हम उस कगार को पार कर चुके हैं। इजरायल का लेबनान पर यह हमला सामान्य सीमाई झड़प नहीं है। जिस तीव्रता और सटीकता से बमबारी की जा रही है, वह संकेत है कि इजरायल लेबनान की सीमा के पास एक 'बफर जोन' बनाने की तैयारी में है। वे चाहते हैं कि उनके उत्तरी नागरिक अपने घरों को लौट सकें, जो पिछले कई महीनों से हिजबुल्लाह की रॉकेट बारी के डर से विस्थापित हैं।

लेकिन क्या हिजबुल्लाह चुप बैठेगा? बिल्कुल नहीं। उनके पास हजारों की संख्या में सटीक मिसाइलें हैं जो तेल अवीव तक पहुँच सकती हैं। समस्या यह है कि हिजबुल्लाह अब एक दुविधा में है। अगर वह पूरी ताकत से हमला करता है, तो लेबनान का हाल भी गाजा जैसा हो सकता है। अगर वह चुप रहता है, तो उसका प्रभाव खत्म हो जाएगा। ईरान, जो हिजबुल्लाह का मुख्य आका है, फिलहाल पर्दे के पीछे से खेल रहा है, लेकिन वह भी कब तक संयम बरतेगा, यह कहना मुश्किल है।

इजरायल की बदली हुई रणनीति और मोसाद का असर

इजरायल ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया है। पहले वे केवल रॉकेट लॉन्च पैड्स को निशाना बनाते थे। अब वे "सिर काटने" की नीति पर चल रहे हैं। यानी नेतृत्व को खत्म करो, संगठन अपने आप बिखर जाएगा। नसरल्लाह के सलाहकार का मारा जाना इसी रणनीति का हिस्सा है। पिछले कुछ हफ्तों में हमने देखा है कि कैसे एक-एक करके हिजबुल्लाह के कमांडर ढेर किए गए हैं।

  • सटीक खुफिया जानकारी: इजरायल के पास लेबनान के भीतर जमीन पर मौजूद संपत्तियों और तकनीकी निगरानी का जबरदस्त नेटवर्क है।
  • हवाई प्रभुत्व: लेबनानी आसमान पर इजरायल का लगभग पूर्ण नियंत्रण है, जिससे उन्हें अपनी मर्जी से हमले करने की छूट मिलती है।
  • अंतरराष्ट्रीय दबाव की अनदेखी: दुनिया युद्ध रोकने की अपील कर रही है, लेकिन इजरायल अपनी सुरक्षा जरूरतों को प्राथमिकता दे रहा है।

यह सब दर्शाता है कि इजरायल अब "मैनेजमेंट" नहीं बल्कि "सॉल्यूशन" चाहता है। वे हिजबुल्लाह के खतरे को टालने के बजाय उसे जड़ से मिटाने की कोशिश कर रहे हैं, भले ही इसकी भारी कीमत चुकानी पड़े।

लेबनान की जनता पर क्या बीत रही है

इस पूरे सैन्य खेल में लेबनान का आम नागरिक पिस रहा है। बेरुत, जो कभी मध्य पूर्व का पेरिस कहा जाता था, अब खौफ के साये में है। लोग समझ नहीं पा रहे कि अगला हमला कहाँ होगा। लेबनान की अर्थव्यवस्था पहले ही चरमराई हुई थी, अब युद्ध के इन बादलों ने रही-सही कसर पूरी कर दी है। दक्षिणी लेबनान से हजारों लोग पलायन कर रहे हैं। गाड़ियां सामान से लदी हैं और सड़कों पर केवल अनिश्चितता है।

इजरायल का दावा है कि वह नागरिकों को पहले ही चेतावनी दे देता है, लेकिन क्या युद्ध में कोई भी जगह वास्तव में सुरक्षित होती है? जब मिसाइलें चलती हैं, तो वे केवल सलाहकार और आतंकवादी नहीं देखतीं। वे घर उजाड़ती हैं और जिंदगियां खत्म करती हैं। हिजबुल्लाह का बुनियादी ढांचा नागरिक इलाकों में फैला हुआ है, जो इजरायल के लिए हमलों का बहाना और आम लोगों के लिए मौत का जाल बन गया है।

क्या ईरान बीच में कूदेगा

यह सबसे बड़ा सवाल है। ईरान ने अब तक अपने 'प्रॉक्सी' संगठनों के जरिए ही लड़ाई लड़ी है। चाहे वो हमास हो या हिजबुल्लाह। लेकिन अब उसके सबसे मजबूत मोहरे यानी हिजबुल्लाह की कमर टूट रही है। अगर ईरान सीधे हस्तक्षेप करता है, तो यह तीसरा विश्व युद्ध न सही, लेकिन एक बहुत बड़ा क्षेत्रीय युद्ध जरूर बन जाएगा। अमेरिका भी चुप नहीं बैठेगा। उसने पहले ही अपने विमान वाहक पोत क्षेत्र में तैनात कर रखे हैं।

ईरान के लिए मुश्किल यह है कि उसकी खुद की अर्थव्यवस्था प्रतिबंधों से बेहाल है। वह एक सीधी जंग का जोखिम नहीं उठाना चाहता, लेकिन वह अपने सबसे बड़े निवेश (हिजबुल्लाह) को बर्बाद होते भी नहीं देख सकता। इसलिए, आने वाले कुछ दिन बहुत महत्वपूर्ण हैं। अगर इजरायल ने नसरल्लाह को सीधे निशाना बनाने की कोशिश की, तो ईरान का धैर्य जवाब दे सकता है।

आगे क्या होने वाला है

अब स्थिति ऐसी है कि छोटी सी गलती भी बड़े विनाश का कारण बन सकती है। इजरायल हमले जारी रखेगा क्योंकि उसे लगता है कि हिजबुल्लाह इस समय कमजोर है। हिजबुल्लाह कोशिश करेगा कि वह अपनी खोई हुई साख वापस पाने के लिए कोई बड़ा पलटवार करे। अंतरराष्ट्रीय समुदाय, खासकर अमेरिका और फ्रांस, युद्धविराम की कोशिशें कर रहे हैं, लेकिन फिलहाल जमीन पर इसका कोई असर नहीं दिख रहा।

हमें यह समझना होगा कि यह लड़ाई सिर्फ जमीन के टुकड़े की नहीं है। यह वर्चस्व और अस्तित्व की लड़ाई है। इजरायल के लिए यह अपनी उत्तरी सीमा को सुरक्षित करने का सवाल है, और हिजबुल्लाह के लिए यह अपनी प्रासंगिकता बचाए रखने की जंग है।

युद्ध की इस आग को रोकने के लिए केवल बातचीत काफी नहीं होगी। जब तक दोनों पक्ष एक-दूसरे के अस्तित्व को स्वीकार नहीं करते, तब तक ये हमले और जवाबी हमले जारी रहेंगे। फिलहाल, इजरायल ने लेबनान में जो किया है, उसने हिजबुल्लाह को रक्षात्मक मुद्रा में ला दिया है। लेकिन इतिहास गवाह है कि मध्य पूर्व में कोई भी जीत स्थायी नहीं होती।

अगर आप इस स्थिति पर नजर रख रहे हैं, तो तैयार रहें। खबरें और भी गंभीर होने वाली हैं। लेबनान का संकट गहराता जा रहा है और इसका असर पूरी दुनिया की तेल कीमतों और कूटनीति पर पड़ना तय है।

NB

Nathan Barnes

Nathan Barnes is known for uncovering stories others miss, combining investigative skills with a knack for accessible, compelling writing.